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समीक्षा

  • "बाला सेक्टर" अगर आप एजेन्डा पढ़ने में यकीन‌ नही रखते हैं, तब यह उपन्यास आपके लिए है

    अगर आप एजेन्डा पढ़ने में यकीन‌ नही रखते हैं, तब यह खबर आपके लिए है। भारत में वामपंथी कलम का अनर्गल प्रलाप स्वतंत्रता के बाद से ही शुरु हो गया था लेकिन 1975 के बाद से यह बजबजा गया। वामपंथ भारत में कांग्रेस कि बौद्धिक बैसाखी बन गया और उसके बाद जो साहित्य के नाम पर षड्यंत्र और कुचर्क का घिनौना खेल...

  • नक्सलबाड़ी : तब और अब

    हम दिल्ली विवि में पढ़ते थे, कुछ मित्र और भाई साहब JNU में थे.... अक्सर JNU जाना होता था, शनिवार और रविवार लगभग वहीँ JNU में ही बीतता था.... उस जमाने में JNU में किसी कोने में भी गैर कम्युनिस्ट विचारधारा का कोई नामलेवा नहीं हुआ करता था.... जो थे भी वो AISA/SFI की भीड़ के आगे दीखते नहीं हैं.... हम बाह...

  • भारत - इज़राइल संबन्ध और मोदी

    आज इज़राइल और भारत के बीच की दोस्ती और व्यापार के बारे में लोग बतियाते फूले नहीं समा रहे है। लेकिन मोदी इज़राइल के सगे नहीं है, इस का लोगों को ज्ञान नहीं है! मोदी ने जो दो बातें इज़राइल के विरुद्ध की है उन में से एक तो बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद ख़ारिज कर दी - संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उस प्रस्ताव ...

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