Read latest updates about "साहित्य" - Page 1

  • विषैला वामपंथ - आर्थिक विकास का भ्रम और समाज के लिए ख़तरा

    केनेडी की हत्या के बाद अमेरिका के प्रेसिडेंट हुए लिंडन B जॉन्सन। उन्हें LBJ से भी पहचाना जाता है। अमेरिका में कृष्णवर्णियों के लिए अलग से वेल्फेयर की योजनाएँ उन्होंने शुरू की। क्या उनका उद्देश्य वाकई समाज कल्याण था? जॉन्सन के एक वाक्य को लेकर विवाद है, जो वाक्य इस काम की मूल प्रेरणा को अधोरेखित...

  • मैं राम हूँ: मैं निर्वासित था अयोध्या से

    मैं राम हूँ - मैं निर्वासित था अयोध्या से मैं राम हूँ - मैं निर्वासित हूँ आज भी अयोध्या से। मैं राम - निर्वासित रहा सीता की उलाहनाओं से भी निःशब्द, राजमहल से निकलती सीता ने नहीं किया मुझसे कोई भी प्रश्न। सीता- निर्वासित किया जिसने अपने प्रति मेरे कर्तव्यों से। मैं राम - निर्वासित...

  • गुरू गोविंद सिंह जी का खालसा "तब और अब"

    दुनिया इतना तो जानती है कि जब धर्म और राष्ट्र खतरे में था तब दशम गुरू गोविंद सिंह जी ने भक्ति, करुणा और सेवा भावी सिखों को अजेय खालसा सैनिक में बदल दिया था पर गुरू गोविंद सिंह जी का एक बहुत बड़ा योगदान और है जिससे प्रायः लोग अनभिज्ञ हैं। गुरू गोविंद सिंह जी दस गुरुओं में अकेले थे जो संस्कृत के...

  • कटता पंजाब बटते लोग - इस्लाम के बाद ईसाई शिकारियों का जाल

    ये बात 2010-11 की है जब मैं ब्लॉग पर लिखता था तब मैनें एक लेख 'सिमटते भारत की वेदनाएं' विषय पर लिखा था। लेख पर आई प्रतिक्रियाओं में एक प्रतिक्रिया एक लड़की की थी जो नीदरलैंड्स से थी। उसका नाम आधा सिख और आधा ईसाई वाला था। चैटिंग से पता चला कि उसकी माँ पंजाबी थी और पिता वहां के ईसाई। लड़की की उम्र थी...

  • नक्सलबाड़ी : तब और अब

    हम दिल्ली विवि में पढ़ते थे, कुछ मित्र और भाई साहब JNU में थे.... अक्सर JNU जाना होता था, शनिवार और रविवार लगभग वहीँ JNU में ही बीतता था.... उस जमाने में JNU में किसी कोने में भी गैर कम्युनिस्ट विचारधारा का कोई नामलेवा नहीं हुआ करता था.... जो थे भी वो AISA/SFI की भीड़ के आगे दीखते नहीं हैं.... हम...

  • ये ढोल पीटने का समय नहीं है : यह भारत-पाक की असली जंग ही है...

    देश मे रह रहे करोड़ों लोग और कश्मीर घाटी के अधिकांश लोग इस 71 साल से चल रही जंग में पाकिस्तान के साथ खड़े हैं... उनकी मनःस्थिति स्पष्ट है कि हिन्दुयुक्त भारत उनका दुश्मन है.. जिसको गज़वा ए हिन्द के तहत युद्ध के इस अंतिम चरण में खत्म कर दिया जाना है... इस खूनी शतरंज में एक तरफ युद्ध विशेषज्ञ... अंतहीन...

  • सिया के राम

    न्यायप्रिय लक्ष्मण से लेकर दुःखी मिथिलावासियों तक और वर्तमान के 'यौन विकृत वामपंथी नारीवादियों' से लेकर सह्रदय संवेदनशील नारीवादियों तक के लिये राम बड़ी परेशानी का विषय रहे हैं। एक ओर उनकी सत्यनिष्ठा, वीरता, सच्चरित्रता तो दूसरी ओर शूर्पणखा के नाक-कान काटना और सबसे बढ़कर अपनी गर्भवती पत्नी का...

  • पर्यावरण संरक्षण: बड़े काम के हमारे मिथक

    एक प्रिंसटन स्कॉलर और सैनिक रॉय स्क्रेनतों ने अपने निबंध, 'लर्निंग हाऊ टू डाई इन द एनथ्रोपोसिन'2013, में लिख डाला कि 'यह सभ्यता मृत हो चुकी है' और इस बात पर जोर दिया कि आगे बढ़ने का एक रास्ता यह जान लेना भी है कि अब कुछ भी नहीं बचा जिससे हम ख़ुद को बचा सकते हों। इसलिए हमें बिना किसी मोह या डर के...

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