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मुसलमानों ने दलितों के 20 घर जलाए "आम तोड़ने" को लेकर हुई थी झड़प

मुसलमानों ने दलितों के 20 घर जलाए आम तोड़ने को लेकर हुई थी झड़पमुसलमानों ने दलितों के 20 घर जलाए "आम तोड़ने" को लेकर हुई थी झड़प

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भदेठी गांव में मंगलवार रात मुसलमानों ने गाँव के ही कुछ दलितों के साथ हुई झड़प के बाद दलित परिवारों के लगभग 20 घरों में आग लगा दी गई, इस आग में 7 परिवारों की मढ़ई (कच्चे मकान) पूरी तरह जल गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस सारे उपद्रव के पीछे भूतपूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के बेहद करीबी सपा नेता "जावेद सिद्दीकी" की भूमिका को लेकर भी पीड़ित पक्ष कार्यवाही की मांग कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार बुधवार शाम तक, दलित समुदाय द्वारा की गई शिकायत पर सराय ख्वाजा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में नामित 57 आरोपियों में से 37 को में गिरफ्तार किया था। इस घटना से बने तनाव के बाद गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए सराय ख्वाजा पुलिस स्टेशन के "स्टेशन हाउस अधिकारी (SHO)" संजीव मिश्रा को लाईन हाजिर कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को आम तोड़ने और पशु चराने को लेकर भदेठी गांव में दलित और मुस्लिम लड़कों के दो समूहों में विवाद के बाद झड़पें हुईं।

लेकिन स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे उपद्रव के पीछे सिर्फ आम तोड़ने को लेकर हुई झड़प मुद्दा नहीं है अपितु मुख्य मुद्दा है मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू दलित परिवारों की लड़कियों के साथ प्रतिदिन की जाने वाली छेड़खानी ?

झगड़े के बाद दलितों ने दिन में ही जब इसकी शिकायत ग्राम प्रधान से की तो उसने हस्तक्षेप करके मामले को शांत करा दिया, लेकिन बाद में, मुस्लिम समुदाय के कुछ लड़के दलित बस्ती में वापस आकार झगड़ा करने लगे, इस के दौरान एक दलित युवक ने एक मुस्लिम लड़के को थप्पड़ मारा, और मामला बढ़ गया... दोनों पक्षों से जमकर पथराव हुआ और उपद्रव के दौरान आरोपियों की ओर से हवाई फायरिंग किए जाने का भी दलित पक्ष द्वारा आरोप लगाया गया। पथराव में दोनों समुदायों के ग्यारह लड़के घायल हो गए। पीड़ितों के अनुसार उसी रात को मुस्लिमों के एक समूह ने आगजनी की और उनके घरों/झोपड़ियों में आग लगा दी।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित दलित परिवारों द्वारा दर्ज़ शिकायत में, आरोप लगाया गया कि लड़ाई तब शुरू हुई जब कुछ मुस्लिम लड़कों ने उन पर जातिवादी गालियों की बौछार कर दी। "जब उनके द्वारा इसका विरोध किया गया, तो मुस्लिम लड़कों ने मार-पिटाई शुरू कर दी... जब पीड़ित परिवार के कुछ सदस्य आरोपियों के घर घटना के बारे में पूछताछ करने गए, तो वहाँ भी उन्हें गालियों का सामना करना पड़ा ।

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शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि मुस्लिम समुदाय के 20-25 अज्ञात लोग लाठी और हथियारों के साथ हमारी बस्ती में आए और हमें मारने की धमकी दी। इस डर के माहौल में महिलाओं और बच्चों को पास के गांव में शरण लेनी पड़ी।

जिस समय सभी लोग Corona जैसी भयानक महामारी से परेशान हैं ऐसे समय इस प्रकार का उपद्रव करने पर पुलिस ने आरोपियों को दंगा करने, हत्या का प्रयास और शांति भंग करने का मामला दर्ज किया है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के कुछ घंटे बाद ही एसपी अशोक कुमार ने सरायख्वाजा एसओ संजीव कुमार मिश्र को लाइन हाजिर करते हुए मामले की जांच एएसपी ग्रामीण संजय राय को सौंपी है एवं पुलिस को उनके खिलाफ कड़े राष्ट्र सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) और गैंगस्टर अधिनियम की कार्रवाई करने का आदेश दिया।

पुलिस के अनुसार आरोपियों पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 1932 की धारा 7, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनयिम 1984 की धारा 3, आपदा प्रबंधन अधिनयिम 2005 की धारा 51, धारा 147, 148, 149, 307, 452, 323, 504, 506, 436, 427, 429, 34, 188, 269 के साथ ही एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, महामारी रोग अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।

दलित परिवारों को हुये नुकसान की भरपाई के लिए, मुख्यमंत्री ने 10,26,450 रुपये की मौद्रिक मदद दी है। उन्होंने अधिकारियों को मानदंडों के अनुसार सामाजिक कल्याण विभाग के माध्यम से पीड़ित परिवारों को 1 लाख रुपये की सहायता प्रदान करने का भी निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री द्वारा जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत इस आगजनी/उपद्रव से पीड़ित परिवारों को मकान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।

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